शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के दौरे के बाद विश्व हिंदू परिषद यानी विहिप की रविवार को अयोध्या में धर्मसभा के आयोजन को लेकर भारी सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं.
अयोध्या शहर के भीतर प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर पुलिस, पीएसी और आरएएफ़ के जवानों की तैनाती और अधिकारियों की हूटर लगी गाड़ियों की आवाजाही ये बता रही है कि सड़कों के दोनों ओर 'अयोध्या चलो' के नारों के साथ जो पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगे हैं, उनका कितना महत्व है.
'जय श्रीराम', 'मंदिर वहीं बनाएंगे', 'हर हिन्दू की यही पुकार-पहले मंदिर फिर सरकार' जैसे नारे यूं तो शनिवार को अयोध्या के लक्ष्मण क़िला मैदान में उद्धव ठाकरे की सभा के दौरान जमकर लग रहे थे, लेकिन ऐसे नारे अयोध्या की फ़िज़ां में पिछले कई दिनों से गूंज रहे हैं. शिवसेना की सभा को संतों के आशीर्वाद लेने के मक़सद से और इसी नाम से शनिवार को आयोजित किया गया था.
महाराष्ट्र के तमाम इलाकों से शिव सैनिक ट्रेन बुक कराकर, गाड़ियों से और बाइक्स से अयोध्या पहुंचे. शिवसैनिक बेहद आक्रामक थे और जोशीले नारे लगा रहे थे.
कड़ी सुरक्षा
अपने नेता उद्धव ठाकरे के एक-एक बयान पर कई-कई नारे लग रहे थे और इन्हीं नारों की ताक़त से उद्धव सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा कर रहे थे.
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुंभकर्ण की भांति सोई हुई सरकार को जगाने के लिए वो अयोध्या आए हैं. उद्धव ठाकरे रविवार को भी अयोध्या में ही हैं.
रविवार को ही होने वाले विश्व हिन्दू परिष्द के कार्यक्रम धर्म सभा को लेकर उनका कहना था कि मंदिर निर्माण कोई भी करे, शिवसेना का उसको समर्थन रहेगा.
शिवसेना और वीएचपी के कार्यक्रमों को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. स्थानीय पुलिस के अलावा 48 कंपनी पीएसी, आरएएफ़ और एडीजी स्तर के सात अधिकारियों की तैनाती यहां की गई है.
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मुस्लिम टोला का माहौल
लखनऊ ज़ोन के डीआईजी ओंकार सिंह का कहना था कि सभी को आश्वस्त किया गया है कि उनकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है, इसलिए बेफ़िक्र रहें. ओंकार सिंह ने कहा कि स्थानीय लोगों को असुविधा न हो, इसलिए कई रास्तों पर गाड़ियों के आवागमन को प्रतिबंधित भी किया गया है.
बावजूद इसके, अयोध्या के स्थानीय नागरिक ख़ुद को परेशानी में महसूस कर रहे हैं. पांजीटोला, मुगलपुरा जैसे कुछ मोहल्ले की मुस्लिम बस्तियों के लोगों ने बातचीत में आशंका जताई कि बढ़ती भीड़ को लेकर उनमें थोड़ा भय का माहौल है, क्योंकि ऐसी ही स्थितियां 1992 में भी बनीं थीं.
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